महाभारत 3.73.3
यदा च किंचित्कुर्यात्स कारणं तत्र भामिनितत्र संचेष्टमानस्य संलक्ष्यं ते विचेष्टितम्
yadā ca kiṃcitkuryātsa kāraṇaṃ tatra bhāminitatra saṃceṣṭamānasya saṃlakṣyaṃ te viceṣṭitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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