महाभारत 3.73.5
एतत्सर्वं समीक्ष्य त्वं चरितं मे निवेदययच्चान्यदपि पश्येथास्तच्चाख्येयं त्वया मम
etatsarvaṃ samīkṣya tvaṃ caritaṃ me nivedayayaccānyadapi paśyethāstaccākhyeyaṃ tvayā mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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