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महाभारत 3.80.10
प्रदक्षिणं यः कुरुते पृथिवीं तीर्थतत्परःकिं फलं तस्य कार्त्स्न्येन तद्ब्रह्मन्वक्तुमर्हसि
pradakṣiṇaṃ yaḥ kurute pṛthivīṃ tīrthatatparaḥkiṃ phalaṃ tasya kārtsnyena tadbrahmanvaktumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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