महाभारत 3.80.12
पुरा भागीरथीतीरे भीष्मो धर्मभृतां वरःपित्र्यं व्रतं समास्थाय न्यवसन्मुनिवत्तदा
purā bhāgīrathītīre bhīṣmo dharmabhṛtāṃ varaḥpitryaṃ vrataṃ samāsthāya nyavasanmunivattadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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