महाभारत 3.80.19
भीष्मोऽहमस्मि भद्रं ते दासोऽस्मि तव सुव्रततव संदर्शनादेव मुक्तोऽहं सर्वकिल्बिषैः
bhīṣmo'hamasmi bhadraṃ te dāso'smi tava suvratatava saṃdarśanādeva mukto'haṃ sarvakilbiṣaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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