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महाभारत 3.80.21
तं दृष्ट्वा नियमेनाथ स्वाध्यायाम्नायकर्शितम्भीष्मं कुरुकुलश्रेष्ठं मुनिः प्रीतमनाभवत्
taṃ dṛṣṭvā niyamenātha svādhyāyāmnāyakarśitambhīṣmaṃ kurukulaśreṣṭhaṃ muniḥ prītamanābhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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