महाभारत 3.80.31
प्रतिग्रहादुपावृत्तः संतुष्टो नियतः शुचिःअहंकारनिवृत्तश्च स तीर्थफलमश्नुते
pratigrahādupāvṛttaḥ saṃtuṣṭo niyataḥ śuciḥahaṃkāranivṛttaśca sa tīrthaphalamaśnute
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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