महाभारत 3.80.68महाकालं ततो गच्छेन्नियतो नियताशनःकोटितीर्थमुपस्पृश्य हयमेधफलं लभेत्mahākālaṃ tato gacchenniyato niyatāśanaḥkoṭitīrthamupaspṛśya hayamedhaphalaṃ labhetइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें