महाभारत 3.80.70
तत्राभिगम्य चेशानं गोसहस्रफलं लभेत्महादेवप्रसादाच्च गाणपत्यमवाप्नुयात्
tatrābhigamya ceśānaṃ gosahasraphalaṃ labhetmahādevaprasādācca gāṇapatyamavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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