महाभारत 3.80.84
त्रिशूलाङ्कानि पद्मानि दृश्यन्ते कुरुनन्दनमहादेवस्य सांनिध्यं तत्रैव भरतर्षभ
triśūlāṅkāni padmāni dṛśyante kurunandanamahādevasya sāṃnidhyaṃ tatraiva bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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