महाभारत 3.80.95
सिन्धूत्तममिति ख्यातं सर्वपापप्रणाशनम्तत्र स्नात्वा नरश्रेष्ठ लभेद्बहु सुवर्णकम्
sindhūttamamiti khyātaṃ sarvapāpapraṇāśanamtatra snātvā naraśreṣṭha labhedbahu suvarṇakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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