महाभारत 3.83.103
असितो देवलश्चैव मार्कण्डेयोऽथ गालवःभरद्वाजो वसिष्ठश्च मुनिरुद्दालकस्तथा
asito devalaścaiva mārkaṇḍeyo'tha gālavaḥbharadvājo vasiṣṭhaśca muniruddālakastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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