महाभारत 3.83.10ऋषभं तीर्थमासाद्य कोशलायां नराधिपवाजपेयमवाप्नोति त्रिरात्रोपोषितो नरःṛṣabhaṃ tīrthamāsādya kośalāyāṃ narādhipavājapeyamavāpnoti trirātropoṣito naraḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें