महाभारत 3.83.18
तत्र देवह्रदे स्नात्वा शुचिः प्रयतमानसःअश्वमेधमवाप्नोति परां सिद्धिं च गच्छति
tatra devahrade snātvā śuciḥ prayatamānasaḥaśvamedhamavāpnoti parāṃ siddhiṃ ca gacchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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