महाभारत 3.83.20
ततो गच्छेत कावेरीं वृतामप्सरसां गणैःतत्र स्नात्वा नरो राजन्गोसहस्रफलं लभेत्
tato gaccheta kāverīṃ vṛtāmapsarasāṃ gaṇaiḥtatra snātvā naro rājangosahasraphalaṃ labhet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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