महाभारत 3.83.33
कुशप्लवनमासाद्य ब्रह्मचारी समाहितःत्रिरात्रमुषितः स्नात्वा अश्वमेधफलं लभेत्
kuśaplavanamāsādya brahmacārī samāhitaḥtrirātramuṣitaḥ snātvā aśvamedhaphalaṃ labhet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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