महाभारत 3.83.41सप्तगोदावरे स्नात्वा नियतो नियताशनःमहत्पुण्यमवाप्नोति देवलोकं च गच्छतिsaptagodāvare snātvā niyato niyatāśanaḥmahatpuṇyamavāpnoti devalokaṃ ca gacchatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें