महाभारत 3.83.42
ततो देवपथं गच्छेन्नियतो नियताशनःदेवसत्रस्य यत्पुण्यं तदवाप्नोति मानवः
tato devapathaṃ gacchenniyato niyatāśanaḥdevasatrasya yatpuṇyaṃ tadavāpnoti mānavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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