महाभारत 3.83.43
तुङ्गकारण्यमासाद्य ब्रह्मचारी जितेन्द्रियःवेदानध्यापयत्तत्र ऋषिः सारस्वतः पुरा
tuṅgakāraṇyamāsādya brahmacārī jitendriyaḥvedānadhyāpayattatra ṛṣiḥ sārasvataḥ purā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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