महाभारत 3.83.46
ऋषयस्तत्र देवाश्च वरुणोऽग्निः प्रजापतिःहरिर्नारायणो देवो महादेवस्तथैव च
ṛṣayastatra devāśca varuṇo'gniḥ prajāpatiḥharirnārāyaṇo devo mahādevastathaiva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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