महाभारत 3.83.55
ततो गिरिवरश्रेष्ठे चित्रकूटे विशां पतेमन्दाकिनीं समासाद्य नदीं पापप्रमोचनीम्
tato girivaraśreṣṭhe citrakūṭe viśāṃ patemandākinīṃ samāsādya nadīṃ pāpapramocanīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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