महाभारत 3.83.60
तत्र कूपो महाराज विश्रुतो भरतर्षभसमुद्रास्तत्र चत्वारो निवसन्ति युधिष्ठिर
tatra kūpo mahārāja viśruto bharatarṣabhasamudrāstatra catvāro nivasanti yudhiṣṭhira
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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