महाभारत 3.83.67
अङ्गिरःप्रमुखाश्चैव तथा ब्रह्मर्षयोऽपरेतथा नागाः सुपर्णाश्च सिद्धाश्चक्रचरास्तथा
aṅgiraḥpramukhāścaiva tathā brahmarṣayo'paretathā nāgāḥ suparṇāśca siddhāścakracarāstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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