महाभारत 3.83.72
प्रयागं सप्रतिष्ठानं कम्बलाश्वतरौ तथातीर्थं भोगवती चैव वेदी प्रोक्ता प्रजापतेः
prayāgaṃ sapratiṣṭhānaṃ kambalāśvatarau tathātīrthaṃ bhogavatī caiva vedī proktā prajāpateḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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