महाभारत 3.84.2
मया स पुरुषव्याघ्रो जिष्णुः सत्यपराक्रमःअस्त्रहेतोर्महाबाहुरमितात्मा विवासितः
mayā sa puruṣavyāghro jiṣṇuḥ satyaparākramaḥastrahetormahābāhuramitātmā vivāsitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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