महाभारत 3.85.13
पवित्रमृषिभिर्जुष्टं पुण्यं पावनमुत्तमम्गङ्गायमुनयोर्वीर संगमं लोकविश्रुतम्
pavitramṛṣibhirjuṣṭaṃ puṇyaṃ pāvanamuttamamgaṅgāyamunayorvīra saṃgamaṃ lokaviśrutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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