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महाभारत 3.85.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
तान्सर्वानुत्सुकान्दृष्ट्वा पाण्डवान्दीनचेतसःआश्वासयंस्तदा धौम्यो बृहस्पतिसमोऽब्रवीत्
tānsarvānutsukāndṛṣṭvā pāṇḍavāndīnacetasaḥāśvāsayaṃstadā dhaumyo bṛhaspatisamo'bravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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