महाभारत 3.85.23
तिसृष्वन्यासु पुण्यानि दिक्षु तीर्थानि मे शृणुसरितः पर्वतांश्चैव पुण्यान्यायतनानि च
tisṛṣvanyāsu puṇyāni dikṣu tīrthāni me śṛṇusaritaḥ parvatāṃścaiva puṇyānyāyatanāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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