महाभारत 3.85.4
तस्यां देवर्षिजुष्टायां नैमिषं नाम भारतयत्र तीर्थानि देवानां सुपुण्यानि पृथक्पृथक्
tasyāṃ devarṣijuṣṭāyāṃ naimiṣaṃ nāma bhāratayatra tīrthāni devānāṃ supuṇyāni pṛthakpṛthak
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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