महाभारत 3.88.27
आदिदेवो महायोगी यत्रास्ते मधुसूदनःपुण्यानामपि तत्पुण्यं तत्र ते संशयोऽस्तु मा
ādidevo mahāyogī yatrāste madhusūdanaḥpuṇyānāmapi tatpuṇyaṃ tatra te saṃśayo'stu mā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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