महाभारत 3.9.8
समीक्षा यादृशी ह्यस्य पाण्डवान्प्रति भारतउपेक्ष्यमाणा सा राजन्महान्तमनयं स्पृशेत्
samīkṣā yādṛśī hyasya pāṇḍavānprati bhārataupekṣyamāṇā sā rājanmahāntamanayaṃ spṛśet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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