महाभारत 3.90.8
सोऽहमिन्द्रस्य वचनान्नियोगादर्जुनस्य चरक्षमाणो भयेभ्यस्त्वां चरिष्यामि त्वया सह
so'hamindrasya vacanānniyogādarjunasya carakṣamāṇo bhayebhyastvāṃ cariṣyāmi tvayā saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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