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महाभारत 3.91.20
शरीरनियमं ह्याहुर्ब्राह्मणा मानुषं व्रतम्मनोविशुद्धां बुद्धिं च दैवमाहुर्व्रतं द्विजाः
śarīraniyamaṃ hyāhurbrāhmaṇā mānuṣaṃ vratammanoviśuddhāṃ buddhiṃ ca daivamāhurvrataṃ dvijāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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