महाभारत 3.91.24
लोमशस्योपसंगृह्य पादौ द्वैपायनस्य चनारदस्य च राजेन्द्र देवर्षेः पर्वतस्य च
lomaśasyopasaṃgṛhya pādau dvaipāyanasya canāradasya ca rājendra devarṣeḥ parvatasya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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