महाभारत 3.91.7
तव वीर्यपरित्राताः शुद्धास्तीर्थपरिप्लुताःभवेम धूतपाप्मानस्तीर्थसंदर्शनान्नृप
tava vīryaparitrātāḥ śuddhāstīrthapariplutāḥbhavema dhūtapāpmānastīrthasaṃdarśanānnṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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