महाभारत 3.93.25
न स्म पूर्वे जनाश्चक्रुर्न करिष्यन्ति चापरेगयो यदकरोद्यज्ञे राजर्षिरमितद्युतिः
na sma pūrve janāścakrurna kariṣyanti cāparegayo yadakarodyajñe rājarṣiramitadyutiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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