महाभारत 3.93.5
प्रयागे देवयजने देवानां पृथिवीपतेऊषुराप्लुत्य गात्राणि तपश्चातस्थुरुत्तमम्
prayāge devayajane devānāṃ pṛthivīpateūṣurāplutya gātrāṇi tapaścātasthuruttamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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