महाभारत 3.96.13
त्रसदस्युश्च तान्सर्वान्प्रत्यगृह्णाद्यथाविधिअभिगम्य महाराज विषयान्ते सवाहनः
trasadasyuśca tānsarvānpratyagṛhṇādyathāvidhiabhigamya mahārāja viṣayānte savāhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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