महाभारत 3.97.11
ततोऽभिवाद्य तमृषिमिल्वलो वाक्यमब्रवीत्दित्सितं यदि वेत्सि त्वं ततो दास्यामि ते वसु
tato'bhivādya tamṛṣimilvalo vākyamabravītditsitaṃ yadi vetsi tvaṃ tato dāsyāmi te vasu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें