महाभारत 3.97.3
ततो राजर्षयः सर्वे विषण्णा गतचेतसःवातापिं संस्कृतं दृष्ट्वा मेषभूतं महासुरम्
tato rājarṣayaḥ sarve viṣaṇṇā gatacetasaḥvātāpiṃ saṃskṛtaṃ dṛṣṭvā meṣabhūtaṃ mahāsuram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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