महाभारत 3.97.4
अथाब्रवीदगस्त्यस्तान्राजर्षीनृषिसत्तमःविषादो वो न कर्तव्यो अहं भोक्ष्ये महासुरम्
athābravīdagastyastānrājarṣīnṛṣisattamaḥviṣādo vo na kartavyo ahaṃ bhokṣye mahāsuram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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