महाभारत 3.99.2
कालकेयैर्महाकायैः समन्तादभिरक्षितम्समुद्यतप्रहरणैः सशृङ्गैरिव पर्वतैः
kālakeyairmahākāyaiḥ samantādabhirakṣitamsamudyatapraharaṇaiḥ saśṛṅgairiva parvataiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें