महाभारत 4.28.4
नावज्ञेयो रिपुस्तात प्राकृतोऽपि बुभूषताकिं पुनः पाण्डवास्तात सर्वास्त्रकुशला रणे
nāvajñeyo ripustāta prākṛto'pi bubhūṣatākiṃ punaḥ pāṇḍavāstāta sarvāstrakuśalā raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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