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महाभारत 4.3.13
केन स्म कर्मणा कृष्णा द्रौपदी विचरिष्यतिन हि किंचिद्विजानाति कर्म कर्तुं यथा स्त्रियः
kena sma karmaṇā kṛṣṇā draupadī vicariṣyatina hi kiṃcidvijānāti karma kartuṃ yathā striyaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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