महाभारत 4.3.2
नकुल उवाच · nakula uvāca
अश्वबन्धो भविष्यामि विराटनृपतेरहम्ग्रन्थिको नाम नाम्नाहं कर्मैतत्सुप्रियं मम
aśvabandho bhaviṣyāmi virāṭanṛpaterahamgranthiko nāma nāmnāhaṃ karmaitatsupriyaṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें