महाभारत 4.3.4
ये मामामन्त्रयिष्यन्ति विराटनगरे जनाःतेभ्य एवं प्रवक्ष्यामि विहरिष्याम्यहं यथा
ye māmāmantrayiṣyanti virāṭanagare janāḥtebhya evaṃ pravakṣyāmi vihariṣyāmyahaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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