महाभारत 4.34.4
स लभेयं यदि त्वन्यं हययानविदं नरम्त्वरावानद्य यात्वाहं समुच्छ्रितमहाध्वजम्
sa labheyaṃ yadi tvanyaṃ hayayānavidaṃ naramtvarāvānadya yātvāhaṃ samucchritamahādhvajam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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