महाभारत 4.37.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
तं दृष्ट्वा क्लीबवेषेण रथस्थं नरपुंगवम्शमीमभिमुखं यान्तं रथमारोप्य चोत्तरम्
taṃ dṛṣṭvā klībaveṣeṇa rathasthaṃ narapuṃgavamśamīmabhimukhaṃ yāntaṃ rathamāropya cottaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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