महाभारत 4.43.10
अद्याहमृणमक्षय्यं पुरा वाचा प्रतिश्रुतम्धार्तराष्ट्रस्य दास्यामि निहत्य समरेऽर्जुनम्
adyāhamṛṇamakṣayyaṃ purā vācā pratiśrutamdhārtarāṣṭrasya dāsyāmi nihatya samare'rjunam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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