महाभारत 4.51.16
उपशाम्यद्रजो भौमं सर्वं व्याप्तं मरीचिभिःदिव्यान्गन्धानुपादाय वायुर्योधानसेवत
upaśāmyadrajo bhaumaṃ sarvaṃ vyāptaṃ marīcibhiḥdivyāngandhānupādāya vāyuryodhānasevata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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